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वर्तमान शुभ समय

वर्तमान चौघड़िया: शुभ

समय: 06:21 AM से 07:48 AM तक। यह शुभ समय है।

मुहूर्त चौघड़िया

मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

Om Namo Bhagavate Vaasudevaaya.

अर्थ एवं महत्व: भगवान विष्णु (वासुदेव) को प्रणाम। विष्णु का सबसे पवित्र द्वादशाक्षर मंत्र।

मंत्र सुनें

संबंधित देवता: Vishnu

आने वाले त्योहार

पवित्र उत्सवों की प्रतीक्षा करें

आज सहित अगले तीन त्योहार — तिथि अनुसार।

सभी त्योहार
Oct 10

पितरों की पूजा का दिन — तर्पण के साथ, दुर्गा पूजा ऋतु का आरंभ।

Oct 11

माँ दुर्गा की नौ रातें — भक्ति, नृत्य और व्रत के साथ मनाई जाती हैं।

Oct 19

नवरात्रि का आठवाँ दिन — माँ महागौरी की पूजा और कन्या पूजन।

Oct08

आज का पवित्र अवलोकन

purnimant

गुरुवार • 08-Oct-2026 • निकटतम गणना: नई दिल्ली

विक्रम संवत 2083

संतुलन जो सृष्टि को धारण करे

गुरुवार परंपरागत रूप से विष्णु भगवान, धर्म, संरक्षण और सद्मार्ग से जुड़ा है।

ॐ नमो नारायणाय
Tithi • तिथि
त्रयोदशीKRISHNA
Nakshatra • नक्षत्र
पूर्व फाल्गुनीPada 3
Yoga • योग
शुक्लShukla
Karana • करण
गरजGaraja
Masa • मास
कार्तिकKartik
08-Oct-2026 06:2108-Oct-2026 17:55
सूर्य अवधि
वर्तमान चौघड़ियाशुभ08-Oct-2026 06:21 — 08-Oct-2026 07:48चौघड़िया — यह वह काल है जो अभी चल रहा है। यह मुहूर्तों से अलग है; चौघड़िया शुभ और अशुभ दोनों हो सकता है।

नई दिल्ली • Asia/Kolkata

विस्तृत पंचांग देखें
मुहूर्त

आज के शुभ और वर्ज्य काल

नई दिल्ली • 08-Oct-2026 • स्थान के अनुसार गणना

पूरा पंचांग
वर्ज्य

यमगण्ड

अभी चल रहा है
वर्ज्य

गुलिक काल

शुभ

अभिजित मुहूर्त

वर्ज्य

राहु काल

Krishna
आज के देवता

Krishna

श्रीकृष्ण

कृष्ण (वासुदेव) — हिन्दू धर्म के सर्वाधिक पूज्य भगवान्, समस्त अवतारों के आदि-स्रोत। भा. १.४.३१ में व्यास की आत्म-परीक्षा का निष्कर्ष: भागवत-धर्म इन्हीं को प्रिय हैं — 'प्रियाः परमहंसानां त एव ह्यच्युतप्रियाः'।

शक्ति प्रत्यक्ष-परोक्ष सर्वज्ञता
शक्ति स्वतन्त्र अधिपतित्व (स्वराट्)
शक्ति नाम संसार और भय से मुक्त करता है

रोचक तथ्य

इन तथ्यों से जानें अपने आराध्य को और करीब से।

#1

समस्त साधनों का अविच्युत अर्थ: उत्तमश्लोक का गुणानुवर्णन

'इदं हि पुंसस्तपसः श्रुतस्य वा... यदुत्तमश्लोकगुणानुवर्णनम्' (भा. १.५.२२)।

#2

एकत्व-मध्ये बहुरूपता — काष्ठ-वह्नि सम

जैसे अवहित अग्नि स्वयोनि (काठों) में एक होकर भी अनेक प्रतीत होती है, वैसे विश्वात्मा पुरुष भूतों में: 'यथाऽवहितो वह्निर्दारुष्वेकः स्वयोनिषु' (भा. १.२.३२)।

#3

भागवत का आदि-उपदेश अज (ब्रह्मा) को

भगवान् कहते हैं कि अपने आदिसर्ग में, नाभि-कमल पर बैठे अज को उन्होंने वह परम ज्ञान कहा था जो उनकी महिमा का अवभास है और जिसे सूरि लोग 'भागवत' कहते हैं: 'पुरा मया प्रोक्तमजाय नाभ्ये पद्मे निषण्णाय ममादिसर्गे' (भा. ३.४.१३)।

#4

श्रीकृष्ण — charioteer of — अर्जुन

कृष्ण अर्जुन के सारथि बने: 'सौहृदादथ सारथिम्' (भा. १.९.२०) तथा 'धृतहयरश्मिनि' (भा. १.९.३९) — घोड़ों की रास थामे। दिशा: सारथि → रथी। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

सटीक पंचांग

अधिक सटीक विवरण के लिए स्थानीय पंचांग खोजें

सूर्योदय, तिथि, मुहूर्त और चौघड़िया आपके स्थान के अनुसार बदलते हैं। अनुमति दें, और हम निकटतम गणना बिंदु से विवरण दिखाएँगे।

सूर्योदय सटीक सूर्योदय और सूर्यास्त समय
मुहूर्त स्थान-आधारित मुहूर्त और चौघड़िया
तिथि सही तिथि और नक्षत्र जानकारी

हम आपका स्थान केवल पंचांग गणना के लिए उपयोग करते हैं। इसे न तो संग्रहीत किया जाता है और न ही किसी के साथ साझा किया जाता है।

ज्ञान कोश

समृद्ध प्रोफ़ाइलें — जानने योग्य पात्र

ये पात्र कम से कम पाँच गुण, तथ्य या मंत्र रखते हैं। कार्ड खोलें, या पूरा कोश देखें।

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पुरुष अवतार

Purusha-avatara (the first cosmic Purusha)

पुरुष-अवतार — सृष्टि-आरम्भ में भगवान् का प्रथम ब्रह्माण्डीय रूप: महत् आदि तत्त्वों से निर्मि…

सृष्टि-आरम्भ में षोडश-कला रू… कारण-जल पर शयन लोक-विस्तर का आकार-प्रारूप; …
12 गुण
सिद्धांत

धर्म

Dharma

धर्म — भारतीय चिन्तन का मूल शब्द है: वह नियम-संहिता और ऋत-बोध जो व्यक्ति, समाज और ब्रह्माण्ड…

भगवत्कथा-रति रहित धर्म श्रमम… सोए, मत्त, बालक, स्त्री और श… कलि-काल में एक ही पैर पर खड़…
8 गुण
सिद्धांत

विराट्पुरुष

Virat-Purusha

विराट्पुरुष अथवा वैराज पुरुष भगवान् का वह स्थूल विश्वरूप है जिसमें सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड ही उन…

सप्त-आवरण-युक्त अण्डकोश ही ज… पाताल चरण, नाभि नभस्तल, सत्य… स्थूल और सूक्ष्म दोनों रूप म…
7 गुण
स्थान

पृथ्वी

Earth (Mahi)

पृथ्वी (मही/भूमि) — हिन्दू परम्परा में धरती-माता (भूदेवी) के रूप में पूज्य, भारतीय संस्कृति …

रसातल में डूबी थी; वराह ने उ… पृथु द्वारा दुग्धा; उर्वर बन… भगवान् के चरण-चिह्नों से अंक…
7 गुण
देवता

श्रीकृष्ण

Krishna

कृष्ण (वासुदेव) — हिन्दू धर्म के सर्वाधिक पूज्य भगवान्, समस्त अवतारों के आदि-स्रोत। भा. १.४.…

उत्पत्ति, स्थिति और लय का मू… प्रत्यक्ष-परोक्ष सर्वज्ञता स्वतन्त्र अधिपतित्व (स्वराट्…
112 गुण
सिद्धांत

रजोगुण

Rajas-guna

रजोगुण — प्रकृति का द्वितीय गुण है: उन्मेष, वेग, इच्छा और कर्मण्यता का स्वभाव — जो चित्त में…

काम-लोभादि का वाहक आद्य ऋषि को न बाँधने वाला, क… स्रष्टा का प्लावक गुण
5 गुण
Human

द्रौपदी

Draupadi

द्रौपदी (कृष्णा / पाञ्चाली) — द्रुपद की कन्या, पाँच पाण्डवों की पत्नी; अग्नि से उत्पन्न परम्…

अश्वत्थामा की कृपा — गुरुपुत… पुत्र-हन्ता को गुरुपुत्र मान… वासुदेव में एकान्त-मति होकर …
5 गुण
सिद्धांत

प्रकृति

Prakriti

प्रकृति — सांख्य-वेदान्त परम्परा की मूल प्रकृति (प्रधान) है: त्रिगुणात्मक अचेतन सत्ता जिससे …

सत्त्व-रजस्-तमस् इनके गुण रज-तम प्रकृति की उपासना-प्रव… भूत, इन्द्रिय और मन असङ्गत र…
5 गुण
नदी

गंगा

Ganga

गंगा (स्वर्धुनी) — भारत की सर्वाधिक पवित्र नदी है जिसका उद्गम हिमालय (गंगोत्री) में और संगम …

स्वर्धुनी — स्पर्श-पवित्रीका… परीक्षित के प्रायोपवेशन का त… हरि के चरण-कमलों की रज से पव…
6 गुण
ग्रंथ

वेद

Vedas

वेद — हिन्दू धर्म के सर्वप्राचीन प्रामाणिक ग्रंथ: ऋग्, यजुः, साम, अथर्व चार संहिताएँ और उनके…

भगवत्-प्रदत्त हृदय-वेद सर्वथा वासुदेव-परायण शिष्य-प्रशिष्यों द्वारा शाखा…
5 गुण
श्रेणी अनुसार विवरण

सरल सारांश से विस्तृत जानकारी तक।

सामान्य जानकारी पहले और परिवर्तन समय, मुहूर्त व स्रोत अलग स्पष्ट श्रेणियों में।