'दाध्यमानः करकञ्जसम्पुटे यथाब्जखण्डे कलहंस उत्स्वनः' (भा. १.११.२); इसका निनाद 'जगद्भयभयावह' है (भा. १.११.३)।
पाञ्चजन्य
Panchajanya
अन्य नाम दरवरः
पाञ्चजन्य — कृष्ण का शङ्ख, जो पञ्चजन नामक शङ्ख-रूपधारी असुर के वध के पश्चात् प्राप्त हुआ; इसी से इसका नाम पड़ा। यह भगवान् के चतुर्भुज रूप के चार आयुधों में से एक है और उनके उद्घोष तथा आह्वान का प्रतीक। महाभारत-युद्ध के आरम्भ में इसका निनाद कौरव-सेना के हृदय विदीर्ण कर गया था। भा. १.११.१–२ में आनर्त पहुँचकर कृष्ण इसे बजाते हैं और वह उनके अधरों की लालिमा से लाल होकर कमल-समूह में कलहंस-सा शोभित होता है; उसका निनाद 'जगत् के भय को भी भयभीत करने वाला' कहा गया है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.11.1 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110182)